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मैं ही मतलूब ख़ुद हूँ तू है अबस | शाही शायरी
main hi matlub KHud hun tu hai abas

ग़ज़ल

मैं ही मतलूब ख़ुद हूँ तू है अबस

अहमद हुसैन माइल

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मैं ही मतलूब ख़ुद हूँ तू है अबस
आज से तेरी जुस्तुजू है अबस

सादगी में है लाख लाख बनाव
आइना तेरे रू-ब-रू है अबस

मुझ को दोनों से कुछ मज़ा न मिला
दिल अबस दिल की आरज़ू है अबस

बाद आब आग ख़ाक गर्द-ए-रूह
ज़िश्त-रूयों में ख़ूब-रू है अबस

तूर-ओ-मूसा हैं ज़र्रे ज़र्रे में
कब तिरा जल्वा चार सू है अबस

लिपटे हैं ख़्वाब में वो दुश्मन से
हाथ याँ ज़ीनत-ए-गुलू है अबस

वाह 'माइल' ख़ुदी में ज़िक्र-ए-अना
चुप रहो तुम ये गुफ़्तुगू है अबस