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मैं अँधेरों का पुजारी हूँ मिरे पास न आ | शाही शायरी
main andheron ka pujari hun mere pas na aa

ग़ज़ल

मैं अँधेरों का पुजारी हूँ मिरे पास न आ

राम रियाज़

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मैं अँधेरों का पुजारी हूँ मिरे पास न आ
अपने माहौल से आरी हूँ मिरे पास न आ

रूप-महलों की तू रानी है तिरा नाम बड़ा
मैं तो कलियों का भिकारी हूँ मिरे पास न आ

मिरी आवाज़ ने कितने ही चमन फूँक दिए
नाला-ए-सुब्ह-ए-बहारी हूँ मिरे पास न आ

रंज-ओ-आलाम के सहराओं में दरिया बन कर
मैं बड़े ज़ोर से जारी हूँ मिरे पास न आ

ठीक है दोस्त वही हूँ मैं तिरा 'राम' मगर
अब मैं हालात से आरी हूँ मिरे पास न आ