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माना कि हम इस दौर का हासिल तो नहीं थे | शाही शायरी
mana ki hum is daur ka hasil to nahin the

ग़ज़ल

माना कि हम इस दौर का हासिल तो नहीं थे

कर्रार नूरी

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माना कि हम इस दौर का हासिल तो नहीं थे
ना-क़दरी-ए-दुनिया के भी क़ाबिल तो नहीं थे

आता तो सही बाद-ए-सहर का कोई झोंका
हम ख़ास किसी फूल पे माइल तो नहीं थे

हर शख़्स ने नक़्श-ए-कफ़-ए-पा हम को बनाया
हर शख़्स की हम राह में हाइल तो नहीं थे

दो घूँट ही पी लेते अगर कोई पिलाता
हम रिन्द-ए-ख़ुश-औक़ात थे साइल तो नहीं थे

क्या बात है 'नूरी' जो है अब लहजे में नर्मी
तुम नर्मी-ए-गुफ़्तार के क़ातिल तो नहीं थे