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लो हम मरीज़-ए-इश्क़ के बीमार-दार हैं | शाही शायरी
lo hum mariz-e-ishq ke bimar-dar hain

ग़ज़ल

लो हम मरीज़-ए-इश्क़ के बीमार-दार हैं

मिर्ज़ा ग़ालिब

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लो हम मरीज़-ए-इश्क़ के बीमार-दार हैं
अच्छा अगर न हो तो मसीहा का क्या इलाज