EN اردو
क्या ग़ज़ब तू ने ऐ बहार किया | शाही शायरी
kya ghazab tu ne ai bahaar kiya

ग़ज़ल

क्या ग़ज़ब तू ने ऐ बहार किया

परवीन फ़ना सय्यद

;

क्या ग़ज़ब तू ने ऐ बहार किया
पत्ती पत्ती को बे-क़रार किया

अब तो सच बोलने की रस्म नहीं
किस ने फिर एहतिमाम-ए-दार किया

आतिश-ए-दर्द में कमी न हुई
लाख आँखों को अश्क-बार किया

रौशनी की तलाश में हम ने
बारहा ज़ुल्मतों से प्यार किया

मौज-दर-मौज थे दुखों के भँवर
हम ने तन्हा सभी को पार किया

जब बनाया था चाँद इतना हसीं
उस का अंजाम क्यूँ ग़ुबार किया