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किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है | शाही शायरी
kisi ka sath miyan ji sada nahin raha hai

ग़ज़ल

किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है

शकील जमाली

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किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है
मगर दिलों को अभी सब्र आ नहीं रहा है

यही तो है जो ख़यालों से जा नहीं रहा है
ये आदमी जो मिरा फ़ोन उठा नहीं रहा है

हमारे बीच कोई बा-वफ़ा नहीं रहा है
ये बात कोई किसी को बता नहीं रहा है

मिरे अज़ीज़ मिरी ग़ीबतों में लग गए हैं
कि अब किसी को कोई मश्ग़ला नहीं रहा है

कहीं उसे मिरा नेमुल-बदल न मिल गया हो
कई दिनों से मिरी सम्त आ नहीं रहा है

ये चंद फ़ैसला-कुन साअतें हैं सब के लिए
इसी लिए तो कोई मुस्कुरा नहीं रहा है

सब अपने अपने कटोरे लिए खड़े हुए हैं
किसी के हाथ अभी कुछ भी आ नहीं रहा है

तिरे गुनाह से पर्दा ज़रूर उट्ठेगा
अभी तो ख़ैर कोई भी उठा नहीं रहा है

जो रंग मुझ से मिरे नाक़िदीन चाहते हैं
वो रंग मेरी कहानी में आ नहीं रहा है