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कीधर की ख़ुशी कहाँ की शादी | शाही शायरी
kidhar ki KHushi kahan ki shadi

ग़ज़ल

कीधर की ख़ुशी कहाँ की शादी

मीर असर

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कीधर की ख़ुशी कहाँ की शादी
जब दिल से हवस ही सब उड़ा दी

ता हाथ लगे न खोज दिल का
अय्यार नीं ज़ुल्फ़ ही उठा दी

पल मारते ख़ाक में मिलाया
टुक हँस के जिधर नज़र मिला दी

यारब सिवा लिक़ा-ए-वजहक
ला-मक़सूदी व ला-मुरादी

देते हो किसे ये बद-दुआएँ
क्या प्यारे 'असर' नीं फिर दुआ दी