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खा जाएगा ये जान को आज़ार देखना | शाही शायरी
kha jaega ye jaan ko aazar dekhna

ग़ज़ल

खा जाएगा ये जान को आज़ार देखना

प्रेम कुमार नज़र

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खा जाएगा ये जान को आज़ार देखना
पहरों किसी को सूरत-ए-दीवार देखना

आहट सी एक पाना दर-ए-जाँ के आस-पास
साया सा इक फ़सील के उस पार देखना

मेरे लिबास में कभी फिर कर गली गली
मेरी नज़र से शहर का किरदार देखना