खा जाएगा ये जान को आज़ार देखना
पहरों किसी को सूरत-ए-दीवार देखना
आहट सी एक पाना दर-ए-जाँ के आस-पास
साया सा इक फ़सील के उस पार देखना
मेरे लिबास में कभी फिर कर गली गली
मेरी नज़र से शहर का किरदार देखना
ग़ज़ल
खा जाएगा ये जान को आज़ार देखना
प्रेम कुमार नज़र

