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कश्ती है तबाह दिल-शुदों की | शाही शायरी
kashti hai tabah dil-shudaon ki

ग़ज़ल

कश्ती है तबाह दिल-शुदों की

जोशिश अज़ीमाबादी

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कश्ती है तबाह दिल-शुदों की
लेना ख़बर अपने बे-ख़ुदों की

ऐ सर्व-सही के एक गुलशन
चलियो मत चाल ख़ुश-क़दों की

क्यूँ-कर वो करे सुलूक हम से
ख़ातिर है अज़ीज़ हासिदों की

तामीर कुनिश्त-ए-दिल हुआ जब
ज़ाहिद न बिना थी मस्जिदों की

कहना मत मान वाइज़ों का
बेहूदा है बात बेहुदों की

दाढ़ी न रहेगी शैख़-साहिब
सोहबत में न बैठो अमरदों की