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कब से माँग रहे हैं तुम से | शाही शायरी
kab se mang rahe hain tum se

ग़ज़ल

कब से माँग रहे हैं तुम से

अफ़ीफ़ सिराज

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कब से माँग रहे हैं तुम से
साग़र से मीना से ख़ुम से

हम भी कुछ कुछ खोए हुए हैं
आप भी लगते हैं गुम-सुम से

जागेंगे बे-जान से जज़्बे
तेरे दहन के हर्फ़-ए-क़ुम से

दोश-ए-फ़रस से देखें नीचे
एक बँधा है दिल भी सुम से

सुन लो फ़साना आँख का मेरी
दरिया से नदी से क़ुल्ज़ुम से