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जो गुम-गश्ता है उस की ज़ात क्या है | शाही शायरी
jo gum-gashta hai uski zat kya hai

ग़ज़ल

जो गुम-गश्ता है उस की ज़ात क्या है

अरमान नज्मी

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जो गुम-गश्ता है उस की ज़ात क्या है
ग़रीब-ए-शहर की औक़ात क्या है

सरों पर साया-ए-आफ़ात क्या है
जो कटती ही नहीं वो रात क्या है

न होने और होने की हक़ीक़त
सवाल-ए-नफ़ी-ओ-इस्बात क्या है

जमी है गर्द की तह बस्तियों पर
हवा के हाथ में सौग़ात क्या है

हिक़ारत में बुझे कुछ तीर-ओ-नश्तर
मिरे कश्कोल में ख़ैरात क्या है

बुझा पाएँ न उन को ओढ़ पाएँ
गुज़िश्ता मौसमों की बात क्या है

कभी देखा न उस को बार-आवर
हमारी फ़स्ल-ए-इम्कानात क्या है

वरक़ पर क्यूँ उतरते हैं शरारे
लहू में शो'ला-ए-जज़्बात क्या है

उभरते डूबते रहते हैं साए
तमाशा एक सा दिन रात क्या है