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जब तिरी याद के जुगनू चमके | शाही शायरी
jab teri yaad ke jugnu chamke

ग़ज़ल

जब तिरी याद के जुगनू चमके

अहमद फ़राज़

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जब तिरी याद के जुगनू चमके
देर तक आँख में आँसू चमके

सख़्त तारीक है दिल की दुनिया
ऐसे आलम में अगर तू चमके

हम ने देखा सर-ए-बाज़ार-ए-वफ़ा
कभी मोती कभी आँसू चमके

शर्त है शिद्दत-ए-एहसास-ए-जमाल
रंग तो रंग है ख़ुशबू चमके

आँख मजबूर-ए-तमाशा है 'फ़राज़'
एक सूरत है कि हर सू चमके