हो चुका नाज़ मुँह दिखाइए बस
ग़ुस्सा मौक़ूफ़ कीजे आइए बस
फ़ाएदा क्या है यूँ खिंचे रहना
मेरी ताक़त न आज़माइए बस
''दोस्त हूँ मैं तिरा'' न कहिए ये हर्फ़
मुझ से झूटी क़सम न खाइए बस
आप को ख़ूब मैं ने देख लिया
तुम हो मतलब के अपने जाइए बस
'मुसहफ़ी' इश्क़ का मज़ा पाया
दिल किसी से न अब लगाइए बस
ग़ज़ल
हो चुका नाज़ मुँह दिखाइए बस
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

