EN اردو
हँसते हँसते वो जो रोया | शाही शायरी
hanste hanste wo jo roya

ग़ज़ल

हँसते हँसते वो जो रोया

प्रेम भण्डारी

;

हँसते हँसते वो जो रोया
कोई दीवाना था गोया

दिल के दुख से देखो मैं ने
आँखों का ये आँगन धोया

आँसू पाए हैरत क्यूँ है
वो काटा है जो था बोया

बरस लगे पाने में जिस को
इक लम्हा में उस को खोया

सारी सारी रात मैं जागा
वो मेरी आँखों में सोया