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दूर हैं वो और कितनी दूर | शाही शायरी
dur hain wo aur kitni dur

ग़ज़ल

दूर हैं वो और कितनी दूर

शकील बदायुनी

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दूर हैं वो और कितनी दूर
फिर भी मिरी नज़रों के हुज़ूर

रंज-ओ-मुसीबत जौर-ओ-सितम
आप की ख़ातिर सब मंज़ूर

दिल पर बीते लब पे न आए
हाए मोहब्बत का दस्तूर

हसरत-ए-दीद अज़ दीद बुलंद
हूर से बेहतर वादा-ए-हूर

पर्दा-ए-रंग-ओ-बू तो उठाओ
होगा कोई न कोई ज़रूर

दौर-ए-तरक़्क़ी क्या है 'शकील'
दुनिया की अक़्लों का फ़ुतूर