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दिल में कुछ है बयान में कुछ है | शाही शायरी
dil mein kuchh hai bayan mein kuchh hai

ग़ज़ल

दिल में कुछ है बयान में कुछ है

मुश्ताक़ अंजुम

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दिल में कुछ है बयान में कुछ है
आप की दास्तान में कुछ है

मेरे वहम-ओ-गुमान से बढ़ कर
उन के तीर-ओ-कमान में कुछ है

पाँव रखिए सँभल के बस्ती में
घर में कुछ साएबान में कुछ है

पैरव-ए-मज़हब-ए-मोहब्बत हूँ
देखता कुछ हूँ ध्यान में कुछ है

जब दिलों में रहे न गुंजाइश
माँ न समझे मकान में कुछ है

रुख़ हवा का न देखिए 'अंजुम'
देखिए बादबान में कुछ है