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दिल चुराना ये काम है तेरा | शाही शायरी
dil churana ye kaam hai tera

ग़ज़ल

दिल चुराना ये काम है तेरा

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

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दिल चुराना ये काम है तेरा
ले गया है तो नाम है तेरा

है क़यामत बपा कि जल्वे में
क़ामत-ए-ख़ुश-ख़िराम है तेरा

जिस ने आलम किया है ज़ेर-ओ-ज़बर
ये ख़त-ए-मुश्क-फ़ाम है तेरा

दीद करने को चाहिएँ आँखें
हर तरफ़ जल्वा आम है तेरा

किस का ये ख़ूँ किए तू आता है
दामन अफ़्शाँ तमाम है तेरा

हो न हो तू हमारी मज्लिस में
तज़्किरा सुब्ह ओ शाम है तेरा

तेग़-ए-अबरू हमें भी दे इक ज़ख़्म
सर पे आलम के दाम है तेरा

तू जो कहता है 'मुसहफ़ी' इधर आ
'मुसहफ़ी' क्या ग़ुलाम है तेरा