बदन के मौसम-ए-बरसात में नहीं आना
विसाल करना है जज़्बात में नहीं आना
मुआ'मलात-ए-मोहब्बत हूँ मैं ग़ुलाम तिरा
पे जान-ए-मन तेरी हर बात में नहीं आना
अजीब रूह की शादी है एक रूह के साथ
किसी भी जिस्म को बारात में नहीं आना
हम आधी रात के बा'द अपने साथ रहते हैं
ख़याल रखना बहुत रात में नहीं आना
ग़ज़ल
बदन के मौसम-ए-बरसात में नहीं आना
फ़रहत एहसास

