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बात कर दिल सती हिजाब निकाल | शाही शायरी
baat kar dil sati hijab nikal

ग़ज़ल

बात कर दिल सती हिजाब निकाल

सिराज औरंगाबादी

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बात कर दिल सती हिजाब निकाल
ग़ुंचा-ए-लब सती गुलाब निकाल

शब-ए-हिज्राँ की तीरगी कर दूर
हुस्न-ए-ताबाँ का आफ़्ताब निकाल

बैत-ए-अबरू का दर्स दे मुझ कूँ
फ़र्द-ए-दीवान-ए-इंतिख़ाब निकाल

बुल-हवस बंद-ए-उक़्दा-ए-ग़म है
ज़ुल्फ़-ए-मुश्कीं सीं पेच-ओ-ताब निकाल

मुनहसिर नहीं है गोशा-गीरी पर
दिल सीं यकसू हो सब हिसाब निकाल

तकिया-ए-मख़्मली सिरहाने रख
लेकिन आँखों सीं अपनी ख़्वाब निकाल

मस्ती-ए-इश्क़ गर तुझे है 'सिराज'
शीशा-ए-चश्म सीं शराब निकाल