मैं ने माना कि दिल नहीं नाकाम
फिर मिरे काम क्यूँ नहीं आता
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
थक गए हम तो फ़ुसूँ-साज़ियाँ करते करते
उस पे चलता नहीं मुतलक़ कोई गंडा तावीज़
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
तिरी तेग़ की आब जाती रही है
मिरे ज़ख़्म पानी चुराए हुए हैं
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
उन के आने में क्यूँ ख़लल डाला
सत्या-नास हो तिरा बदली
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
उन्हें हाल-ए-दिल किस तरह लिख के भेजें
न हम उन से वाक़िफ़ न वो हम से वाक़िफ़
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
ये बतलाओ हम को भी पहचानते हो
हमें क्या जो हो सारे आलम से वाक़िफ़
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
ये भी न पूछा तुम ने 'अंजुम' जीता है या मरता है
वाह-जी-वा आशिक़ से कोई ऐसी ग़फ़लत करता है
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
ये है आवारा-तबीअत और वो नाज़ुक-मिज़ाज
मैं दिल-ए-वारफ़्ता नज़्र-ए-यार कर सकता नहीं
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम
जा लगेगी कश्ती-ए-दिल साहिल-ए-उम्मीद पर
दीदा-ए-तर से अगर दरिया रवाँ हो जाएगा
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम

