पहुँचे उस को सलाम मेरा
भूले से न ले जो नाम मेरा
हफ़ीज़ जौनपुरी
क़ैद में इतना ज़माना हो गया
अब क़फ़स भी आशियाना हो गया
having been in prison all these years
to me this cage a haven now appears
हफ़ीज़ जौनपुरी
पी लो दो घूँट कि साक़ी की रहे बात 'हफ़ीज़'
साफ़ इंकार से ख़ातिर-शिकनी होती है
हफ़ीज़ जौनपुरी
पी कर दो घूँट देख ज़ाहिद
क्या तुझ से कहूँ शराब क्या है
हफ़ीज़ जौनपुरी
परी थी कोई छलावा थी या जवानी थी
कहाँ ये हो गई चम्पत झलक दिखा के मुझे
हफ़ीज़ जौनपुरी
मिरी शराब की तौबा पे जा न ऐ वाइज़
नशे की बात नहीं ए'तिबार के क़ाबिल
हफ़ीज़ जौनपुरी
लुट गया वो तिरे कूचे में धरा जिस ने क़दम
इस तरह की भी कहीं राहज़नी होती है
हफ़ीज़ जौनपुरी
मिरे बुत-ख़ाने से हो कर चला जा काबे को ज़ाहिद
ब-ज़ाहिर फ़र्क़ है बातिन में दोनों एक रस्ते हैं
हफ़ीज़ जौनपुरी
क़सम निबाह की खाई थी उम्र भर के लिए
अभी से आँख चुराते हो इक नज़र के लिए
हफ़ीज़ जौनपुरी

