EN اردو
अमीर क़ज़लबाश शायरी | शाही शायरी

अमीर क़ज़लबाश शेर

33 शेर

मुज़्तरिब हैं मौजें क्यूँ उठ रहे हैं तूफ़ाँ क्यूँ
क्या किसी सफ़ीने को आरज़ू-ए-साहिल है

Why are the waves so agitated, why do storms unfold?
Does a ship amidst the seas, seek the shores again?

अमीर क़ज़लबाश




सुना है अब भी मिरे हाथ की लकीरों में
नजूमियों को मुक़द्दर दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश




सुब्ह तक मैं सोचता हूँ शाम से
जी रहा है कौन मेरे नाम से

अमीर क़ज़लबाश




क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी
मेरे सोगवारों में आज मेरा क़ातिल है

Today amongst my mourners, my murderer too grieves
A death, a murder as was mine, all lovers should attain

अमीर क़ज़लबाश




पूछा है ग़ैर से मिरे हाल-ए-तबाह को
इज़हार-ए-दोस्ती भी किया दुश्मनी के साथ

अमीर क़ज़लबाश




मिरे पड़ोस में ऐसे भी लोग बसते हैं
जो मुझ में ढूँड रहे हैं बुराइयाँ अपनी

अमीर क़ज़लबाश




मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा

अमीर क़ज़लबाश




तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो
किस किस को बताओगे कि घर क्यूँ नहीं जाते

अमीर क़ज़लबाश




मुझ से बच बच के चली है दुनिया
मेरे नज़दीक ख़ुदा हो जैसे

अमीर क़ज़लबाश