मसर्रतों ने तो चाहा था दिल में आ जाएँ
हुजूम-ए-ग़म ने मगर उन को रास्ता न दिया
happiness did indeed in my heart seek place
but the crowd of sorrows did not move to give them space
मुशीर झंझान्वी
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वो सुन सकें कोई उनवाँ इसी लिए हम ने
बदल बदल के उन्हें दास्ताँ सुनाई है
मुशीर झंझान्वी
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