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पागल | शाही शायरी
pagal

नज़्म

पागल

सलीम अहमद

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सुब्ह को बिस्तर से उठा
होटल में जाने के लिए

बाज़ार में आया
देखा

सब उल्टे हैं
सब मुझ को देख के हँसते थे

आवाज़े कसते थे
तुम उल्टे हो

तुम उल्टे हो