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ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती | शाही शायरी
ye meri duniya ye meri hasti

ग़ज़ल

ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती

असरार-उल-हक़ मजाज़

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ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती
नग़्मा-तराज़ी सहबा-परस्ती

शाइर की दुनिया शाइर की हस्ती
या नाला-ए-ग़म या शोर-ए-मस्ती

सब से गुरेज़ाँ सब पर बरसती
आँखों की मस्ती महँगी न सस्ती

या ख़ुल्द ओ साक़ी ऐ जज़्ब-ए-मस्ती
या टुकड़े टुकड़े दामान-ए-हस्ती

महव-ए-सफ़र हूँ गर्म-ए-सफ़र हूँ
मेरी नज़र में रिफ़अत न पस्ती

इन अँखड़ियों का आलम न पूछो
सहबा ही सहबा मस्ती ही मस्ती

वो आ भी जाते वो हो भी जाते
चश्म-ए-तमन्ना फिर भी तरसती

उन का करम है उन की मोहब्बत
क्या मेरे नग़्मे क्या मेरी हस्ती