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यहाँ से है कहानी रात वाली | शाही शायरी
yahan se hai kahani raat wali

ग़ज़ल

यहाँ से है कहानी रात वाली

ख़ालिद महमूद

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यहाँ से है कहानी रात वाली
कि वो इक रात थी बरसात वाली

कहा था जो वही कर के दिखाया
वो बर्क़-ए-बे-अमाँ थी बात वाली

बड़ी लम्बी प्लैनिंग कर रही है
हमारी ज़िंदगी लम्हात वाली

किसी की भी नहीं होती ये दुनिया
कि इस की ज़ात है बद-ज़ात वाली

हमारा हौसला है ज़िंदगी से
लड़े जाते हैं कुश्ती मात वाली

न अब घर में वो तहज़ीबी तवाज़ुन
न अब वो कोठरी जिन्नात वाली

जिसे देखो छुपा फिरता है 'ख़ालिद'
जमाअत आ गई मेवात वाली