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यार का ध्यान हम न छोड़ेंगे | शाही शायरी
yar ka dhyan hum na chhoDenge

ग़ज़ल

यार का ध्यान हम न छोड़ेंगे

मीर हसन

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यार का ध्यान हम न छोड़ेंगे
अपनी ये आन हम न छोड़ेंगे

जब तलक दम में है हमारे दम
तुझ को ऐ जान हम न छोड़ेंगे

तेरे हाथों से ऐ जुनूँ साबित
ये गरेबान हम न छोड़ेंगे

है बड़ा कुफ़्र तर्क-ए-इश्क़-ए-बुताँ
अपना ईमान हम न छोड़ेंगे

बअ'द मजनूँ के शोर से ख़ाली
ये बयाबान हम न छोड़ेंगे

दिल में और हम में है ये क़ौल-ओ-क़रार
उस को हर आन हम न छोड़ेंगे

दिल न छोड़ेगा तेरा दामन और
दिल का दामान हम न छोड़ेंगे

बिन लिए बोसा आज तो तुझ को
मान मत मान हम न छोड़ेंगे

है 'हसन' वाँ यही जो बे-क़रनी
कब तलक शान हम न छोड़ेंगे