यार का ध्यान हम न छोड़ेंगे
अपनी ये आन हम न छोड़ेंगे
जब तलक दम में है हमारे दम
तुझ को ऐ जान हम न छोड़ेंगे
तेरे हाथों से ऐ जुनूँ साबित
ये गरेबान हम न छोड़ेंगे
है बड़ा कुफ़्र तर्क-ए-इश्क़-ए-बुताँ
अपना ईमान हम न छोड़ेंगे
बअ'द मजनूँ के शोर से ख़ाली
ये बयाबान हम न छोड़ेंगे
दिल में और हम में है ये क़ौल-ओ-क़रार
उस को हर आन हम न छोड़ेंगे
दिल न छोड़ेगा तेरा दामन और
दिल का दामान हम न छोड़ेंगे
बिन लिए बोसा आज तो तुझ को
मान मत मान हम न छोड़ेंगे
है 'हसन' वाँ यही जो बे-क़रनी
कब तलक शान हम न छोड़ेंगे
ग़ज़ल
यार का ध्यान हम न छोड़ेंगे
मीर हसन

