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वो रम-शिआ'र मिरा शोख़-दीदा आया था | शाही शायरी
wo ram-shiar mera shoKH-dida aaya tha

ग़ज़ल

वो रम-शिआ'र मिरा शोख़-दीदा आया था

पंडित जवाहर नाथ साक़ी

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वो रम-शिआ'र मिरा शोख़-दीदा आया था
वो इशवा-संज कशीदा कशीदा आया था

किया है चश्म-ए-मुरव्वत ने आज माइल-ए-मेहर
मैं उन की बज़्म से कल आबदीदा आया था

जो राज़-ए-दिल था वो ख़ल्वत में सब कहा हम ने
कोई भी साथ नहीं था जरीदा आया था

वो मुर्ग़-ए-बिस्मिल-ए-उल्फ़त फ़िदा-ए-हुस्न तिरा
ब-शक्ल-ए-ताइर-ए-रंग-ए-परीदा आया था

वो तेरे जज़्ब-ए-मोहब्बत का शौक़-ए-मस्ताना
जुनूँ-लिबास गरेबाँ दरीदा आया था

तुम्हारा बुलबुल-ए-कश्मीर शेफ़्ता शैदा
बहार-ए-जल्वा लिए इक क़सीदा आया था

सितम-ज़रीफ़ हैं पीर-ए-मुग़ाँ भी मय-ख़्वारो
कहाँ सुरूर में 'साक़ी' न-दीदा आया था