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वो नज़र है सुराग़ में दिल के | शाही शायरी
wo nazar hai suragh mein dil ke

ग़ज़ल

वो नज़र है सुराग़ में दिल के

ऐन सलाम

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वो नज़र है सुराग़ में दिल के
फूल महके हैं दाग़ में दिल के

हसरतों की न पूछ कैफ़िय्यत
ख़ून-ए-दिल है अयाग़ में दिल के

जल बुझी एक एक आस मगर
गुल है रौशन-चराग़ में दिल के

वो जो आए तो आए सुब्ह-ए-बहार
घुप अँधेरा है बाग़ में दिल के

फिर उसी गुल-बदन की याद आई
फिर महक सी है दाग़ में दिल के

यूँ झलकता है प्यार उन आँखों में
चाँद जैसे अयाग़ में दिल के