वो नज़र है सुराग़ में दिल के
फूल महके हैं दाग़ में दिल के
हसरतों की न पूछ कैफ़िय्यत
ख़ून-ए-दिल है अयाग़ में दिल के
जल बुझी एक एक आस मगर
गुल है रौशन-चराग़ में दिल के
वो जो आए तो आए सुब्ह-ए-बहार
घुप अँधेरा है बाग़ में दिल के
फिर उसी गुल-बदन की याद आई
फिर महक सी है दाग़ में दिल के
यूँ झलकता है प्यार उन आँखों में
चाँद जैसे अयाग़ में दिल के
ग़ज़ल
वो नज़र है सुराग़ में दिल के
ऐन सलाम

