वक़्फ़ कर के ज़िंदगी की साअ'तें तेरे लिए
अपने सर लीं मैं ने क्या क्या आफ़तें तेरे लिए
कर लिया नज़्ज़ारा-ए-हुस्न अपनी आँखों पर हराम
मैं ने रद्द कर दीं नज़र की दावतें तेरे लिए
तेरे मिलने के लिए मुमकिन थीं जितनी सूरतें
मैं ने कर डालीं वो सारी सूरतें तेरे लिए
दुश्मनों की फब्तियाँ और दोस्तों की ला'न-ता'न
ओढ़ लीं दुनिया की सारी लानतें तेरे लिए
बैठ कर तेरी गली में बैठने वालों के पास
ख़ाक कर लीं अपनी शख़्सी अज़्मतें तेरे लिए
अपनी इज़्ज़त आप करने का भी जिन को हक़ नहीं
मैं ने उन लोगों की की हैं इज़्ज़तें तेरे लिए
अपनी ख़िदमत जिन से लेने मैं शराफ़त को हो आर
की हैं उन लोगों की मैं ने ख़िदमतें तेरे लिए
कल जो मेरी मिन्नतें करते थे अपने वास्ते
आज मैं करता हूँ उन की मिन्नतें तेरे लिए
तेरे क़दमों के सिवा उन की तलाफ़ी ही नहीं
मैं जो बर्दाश्त की हैं ज़िल्लतें तेरे लिए
मुझ को जिन की क़िस्मतों ने कर रखा था पाएमाल
रौंद डालीं मैं ने उन की क़िस्मतें तेरे लिए
जिन मज़ारों पर ख़ुदा के मानने वाले न जाएँ
मैं ने उन पर जा के मानीं मिन्नतें तेरे लिए
कुफ़्र शरमाता है जिन से झेंपता है जिन से शिर्क
मैं ने की हैं कैसी कैसी बिदअ'तें तेरे लिए
आमिलों ने फ़र्ज़ पढ़वा दीं नमाज़ें सैकड़ों
दो की चार और चार की दो रकअ'तें तेरे लिए
राहत-ए-दारैन में भी वो ख़ुशी मफ़क़ूद है
जिस ख़ुशी से मैं ने झेलीं आफ़तें तेरे लिए
जिन में होता था मिरे दिल पर नुज़ूल-ए-वही-ए-शे'र
वक़्फ़-ए-आह-ओ-नाला हैं वो साअ'तें तेरे लिए
काश तू लिक्खे कि 'बिस्मिल' कुछ ख़बर भी है तुझे
किस क़दर ग़मगीं हैं मेरी ख़ल्वतें तेरे लिए
ग़ज़ल
वक़्फ़ कर के ज़िंदगी की साअ'तें तेरे लिए
बिस्मिल सईदी

