EN اردو
उस की तिमसाल को पाने में ज़माने लग जाएँ | शाही शायरी
uski timsal ko pane mein zamane lag jaen

ग़ज़ल

उस की तिमसाल को पाने में ज़माने लग जाएँ

इरफ़ान सिद्दीक़ी

;

उस की तिमसाल को पाने में ज़माने लग जाएँ
हम अगर आईना-ख़ानों ही में जाने लग जाएँ

क्या तमाशा है कि जब बिकने पे राज़ी हो ये दिल
अहल-ए-बाज़ार दुकानों को बढ़ाने लग जाएँ

पाँव में ख़ाक ही ज़ंजीर-ए-गिराँ है कि नहीं
पूछना लोग जब इस शहर से जाने लग जाएँ

आशिक़ी के भी कुछ आदाब हुआ करते हैं
ज़ख़्म खाया है तो क्या हश्र उठाने लग जाएँ

और किस तरह करें हुस्न-ए-ख़ुदा-दाद का शुक्र
शेर लिखने लगें तस्वीर बनाने लग जाएँ

कुछ तो ज़ाहिर हो कि हैं जश्न में शामिल हम लोग
कुछ नहीं है तो चलो ख़ाक उड़ाने लग जाएँ