EN اردو
उधर अब्र ले चश्म-ए-नम को चला | शाही शायरी
udhar abr le chashm-e-nam ko chala

ग़ज़ल

उधर अब्र ले चश्म-ए-नम को चला

शाह नसीर

;

उधर अब्र ले चश्म-ए-नम को चला
इधर साक़िया! मैं भी यम को चला

मुबारक हो काबा तुम्हें शैख़-जी!
ये बंदा तो बैतुस-सनम को चला

सर-ए-रह-गुज़र आह ऐ बे-निशाँ
किधर छोड़ नक़्श-ए-क़दम को चला

जवाहर का टुकड़ा है ये लख़्त-ए-दिल
तू ऐ अश्क ले इस रक़म को चला

तिरा माइल-ए-हुस्न ऐ सर्व-क़द
सुना है कि मुल्क-ए-अदम को चला

हुबाब-ए-लब-ए-जू की मानिंद आह
ख़बर जल्द ले कोई दम को चला

तिरे इश्क़ में साथ अपने 'नसीर'
लिए हसरत-ओ-दर्द-ओ-ग़म को चला