तुझ से ज़ालिम को अपना यार किया
हम ने क्या जब्र इख़्तियार किया
मिस्ल-ए-सीमाब बे-क़रार रहे
एक जा हम ने कब क़रार किया
आँखें पथरा गईं ऐ संगीं-दिल
याँ तलक तेरा इंतिज़ार किया
तू जो कहता है जल्द आऊँगा
मैं ने क्या तेरा ए'तिबार किया
जैब तो क्या है नासेहो हम ने
चाक सीने को ग़ुंचा-वार किया
नज़र आए क़यास से बाहर
दिल के ज़ख़्मों को जब शुमार किया
आतिश-ए-इश्क़ ने ब-रंग-ए-सिपंद
दाना-ए-दिल को बे-क़रार किया
तू वफ़ा से न दर-गुज़र 'जोशिश'
उस ने गो जौर इख़्तियार किया
ग़ज़ल
तुझ से ज़ालिम को अपना यार किया
जोशिश अज़ीमाबादी

