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तुझ में जिस दम धियान जाता है | शाही शायरी
tujh mein jis dam dhiyan jata hai

ग़ज़ल

तुझ में जिस दम धियान जाता है

मिर्ज़ा अज़फ़री

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तुझ में जिस दम धियान जाता है
होश आया उस आन जाता है

दिल मिरा गुम हुआ सनम अल्लाह
तुझ पे मेरा गुमान जाना है

तेरे मिज़्गाँ की क्या करूँ तारीफ़
तीर ये बे-कमान जाता है

हाए ज़ालिम हूँ नीम-जाँ टुक देख
हाथ से इक जवान जाता है

सज मिरे शोख़ की ज़रा देखो
जैसे बाँका पठान जाता है