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तिरी ही तरह हमें याद आने वाला हो | शाही शायरी
teri hi tarah hamein yaad aane wala ho

ग़ज़ल

तिरी ही तरह हमें याद आने वाला हो

कर्रार नूरी

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तिरी ही तरह हमें याद आने वाला हो
तिरे सिवा भी कोई तो सताने वाला हो

हर एक सुब्ह यही दिल में हूक उठती है
हमें भी नाज़ से कोई जगाने वाला हो

वो किस उमीद पे घर में रहे कि जिस घर में
न आने वाला हो कोई न जाने वाला हो

हर इक से नज़रें मिलाई हैं उन के कूचे में
कि जैसे अब कोई हम को बुलाने वाला हो

है दोस्तों के लिए आइना नज़र मेरी
नज़र मिलाए जो नज़रें मिलाने वाला हो

कि जैसे कोई बला मुझ पे आने वाली है
हिरास कहता है कोई बचाने वाला हो

चलूँ तो साथ चले और रुकूँ तो साथ न दे
क़दम क़दम पे कोई दिल बढ़ाने वाला हो

किसी को शहर में अब हम से लाग है न लगाओ
कोई तो हम से भी नज़रें बचाने वाला हो

हमारे शहर में क्या क्या सजे सजाए हैं घर
हमारे घर को भी कोई सजाने वाला हो