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तेरी जो याद ऐ दिल-ख़्वाह भूला | शाही शायरी
teri jo yaad ai dil-KHwah bhula

ग़ज़ल

तेरी जो याद ऐ दिल-ख़्वाह भूला

हैदर अली आतिश

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तेरी जो याद ऐ दिल-ख़्वाह भूला
बिल्लाह भूला वल्लाह भूला

फ़ुर्क़त की शब में जाँ-सोज़ दिल ने
उफ़ उफ़ किया जो आह आह भूला

कज रख न पा को जा दिल से ग़ाफ़िल
फेर उस ने खाया जो राह भूला

ज़ुन्नार डाला तस्बीह फीकी
इश्क़-ए-सनम में अल्लाह भूला

ख़ुर ने गिराया उस को नज़र से
जो ज़र्रा तेरी दरगाह भूला

ज़ुल्फ़-ए-रसा को समझा जो अफ़ई
चूका वो क़स्र-ए-कोताह भूला

देखे से तेरा रू-ए-मुनव्वर
हम महर भूला हम माह भूला

महरूम रखा साक़ी ने हम को
अपने गदा को जम-जाह भूला

बुत-ख़ाना छोड़ा बाज़ आए बुत से
वो शहर भूला वो शाह भूला

शर्त वफ़ा की किस बे-वफ़ा से
'आतिश' सा आरिफ़-ए-आगाह भूला