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तेरा ख़याल तेरी तमन्ना तक आ गया | शाही शायरी
tera KHayal teri tamanna tak aa gaya

ग़ज़ल

तेरा ख़याल तेरी तमन्ना तक आ गया

काशिफ़ हुसैन ग़ाएर

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तेरा ख़याल तेरी तमन्ना तक आ गया
मैं दिल को ढूँढता हुआ दुनिया तक आ गया

क्या इतना बढ़ गया मिरी तिश्ना-लबी का शोर
सैलाब देखने मुझे सहरा तक आ गया

लेकिन ख़िज़ाँ की नज़्र क्या आख़िरी गुलाब
हर चंद उस में मुझ को पसीना तक आ गया

आगे रह-ए-फ़िराक़ में आना है और क्या
आँखों के आगे आज अंधेरा तक आ गया

क्या इर्तिक़ा-पज़ीर है इंसान का ज़मीर
रिश्तों को छोड़-छाड़ के अश्या तक आ गया

लेकिन किसी दरीचे से झाँका न कोई रात
सुन कर मिरी पुकार सितारा तक आ गया

'काशिफ़' हुसैन यार उठो अब तो चल पड़ो
चल कर तुम्हारे पाँव में रस्ता तक आ गया