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तसव्वुरात में दिल की उड़ान देख ज़रा | शाही शायरी
tasawwuraat mein dil ki uDan dekh zara

ग़ज़ल

तसव्वुरात में दिल की उड़ान देख ज़रा

सिया सचदेव

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तसव्वुरात में दिल की उड़ान देख ज़रा
उसी ज़मीं से कभी आसमान देख ज़रा

अभी तो जिस्म के ही घाव तू ने देखे हैं
जो मेरे दिल पे हैं वो भी निशान देख ज़रा

तू इस से पहले करें बात ग़ैर संजीदा
मिरा मिज़ाज मिरे क़द्र-दान देख ज़रा

धुआँ भी हो गया अब तो फ़ज़ाओं से ग़ाएब
कहाँ है शहर में मेरा मकान देख ज़रा

हक़ीर नज़रों से ऐ मुझ को देखने वाले
मिरा घराना मिरा ख़ानदान देख ज़रा

ज़मीन फटने का करती हूँ इंतिज़ार 'सिया'
मिरा जुनून मिरे इम्तिहान देख ज़रा