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तमन्ना को गुल-ओ-गुलज़ार करना | शाही शायरी
tamanna ko gul-o-gulzar karna

ग़ज़ल

तमन्ना को गुल-ओ-गुलज़ार करना

अबुल हसनात हक़्क़ी

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तमन्ना को गुल-ओ-गुलज़ार करना
मिरे दश्त-ए-तलब को पार करना

मिरे मालिक मुझे आसान कर दे
गुज़र हर-सम्त से इक बार करना

मुझे भी रफ़्ता रफ़्ता आ गया है
ख़ुद अपने काम को दुश्वार करना

नहीं यारों में सच सुनने का यारा
बरहना मस्ती-ए-गुफ़्तार करना

मैं तन्हाई में बैठा रो रहा हूँ
बहुत अच्छा लगा था प्यार करना