तमन्ना को गुल-ओ-गुलज़ार करना
मिरे दश्त-ए-तलब को पार करना
मिरे मालिक मुझे आसान कर दे
गुज़र हर-सम्त से इक बार करना
मुझे भी रफ़्ता रफ़्ता आ गया है
ख़ुद अपने काम को दुश्वार करना
नहीं यारों में सच सुनने का यारा
बरहना मस्ती-ए-गुफ़्तार करना
मैं तन्हाई में बैठा रो रहा हूँ
बहुत अच्छा लगा था प्यार करना
ग़ज़ल
तमन्ना को गुल-ओ-गुलज़ार करना
अबुल हसनात हक़्क़ी

