EN اردو
तय किया इस तरह सफ़र तन्हा | शाही शायरी
tai kiya is tarah safar tanha

ग़ज़ल

तय किया इस तरह सफ़र तन्हा

हुरमतुल इकराम

;

तय किया इस तरह सफ़र तन्हा
एक हम एक रहगुज़र तन्हा

कौन होता रफ़ीक़-ए-तीरा-शबी
दिल जलाया है ता-सहर तन्हा

ख़ैरियत पूछने को आई है
ज़िंदगी मुझ को देख कर तन्हा

आफ़त-ए-जाँ है वज़-ए-हम-सफ़री
वक़्त की राह से गुज़र तन्हा

धड़कनों का भी है अजब अंदाज़
दिल की वादी है किस क़दर तन्हा

न मिला दर्द-आश्ना कोई
कट गया दर्द का सफ़र तन्हा

दश्त में अपनी ही तजल्ली के
झिलमिलाया किया क़मर तन्हा

साअ'तें देती ही रहीं आवाज़
ज़िंदगी चल पड़ी किधर तन्हा

क़त्ल-गाह-ए-वफ़ा मिली ख़ाली
'हुर्मत' आए हमीं नज़र तन्हा