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तबस्सुम है वो होंटों पर जो दिल का काम कर जाए | शाही शायरी
tabassum hai wo honTon par jo dil ka kaam kar jae

ग़ज़ल

तबस्सुम है वो होंटों पर जो दिल का काम कर जाए

जोश मलीहाबादी

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तबस्सुम है वो होंटों पर जो दिल का काम कर जाए
उन्हें इस की नहीं परवा कोई मरता है मर जाए

दुआ है मेरी ऐ दिल तुझ से दुनिया कूच कर जाए
और ऐसी कुछ बने तुझ पर कि अरमानों से डर जाए

जो मौक़ा मिल गया तो ख़िज़्र से ये बात पूछेंगे
जिसे हो जुस्तुजू अपनी वो बेचारा किधर जाए

सहर को सीना-ए-आलम में परतव डालने वाले
तसद्दुक़ अपने जल्वे का मिरा बातिन सँवर जाए

परेशाँ बाल करते हैं उन्हें शोख़ी से मतलब है
बिखरता है अगर शीराज़ा-ए-आलम बिखर जाए

हयात-ए-दाइमी की लहर है इस ज़िंदगानी में
अगर मरने से पहले बन पड़े तो 'जोश' मर जाए