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ताब-ए-दीदार जू लाए मुझे वो दिल देना | शाही शायरी
tab-e-didar ju lae mujhe wo dil dena

ग़ज़ल

ताब-ए-दीदार जू लाए मुझे वो दिल देना

आसी ग़ाज़ीपुरी

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ताब-ए-दीदार जू लाए मुझे वो दिल देना
मुँह क़यामत में दिखा सकने के क़ाबिल देना

ना-तवानों के सहारे को है ये भी काफ़ी
दामन-ए-लुत्फ़ ग़ुबार-ए-पस-ए-महमिल देना

ज़ौक़ में सूरत-ए-मौज आ के फ़ना हो जाऊँ
कोई बोसा तो भला ऐ लब-ए-साहिल देना

हाए रे हाए तिरी उक़्दा-कुशाई के मज़े
तू ही खोले जिसे वो उक़्दा-ए-मुश्किल देना

एक फ़ित्ना है क़यामत में बहार-ए-फ़िरदौस
जुज़ तिरे कुछ भी न चाहे मुझे वो दिल देना

दर्द का कोई महल ही नहीं जब दल के सिवा
मुझ को हर उज़्व के बदले हमा-तन दिल देना