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सर पर कोई आसमान रख दे | शाही शायरी
sar par koi aasman rakh de

ग़ज़ल

सर पर कोई आसमान रख दे

गौहर होशियारपुरी

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सर पर कोई आसमान रख दे
इक मुँह में मगर ज़बान रख दे

आ सुल्ह नहीं सलाम तो ले
ये तीर चढ़ी कमान रख दे

इतना भी न बे-लिहाज़ हो जा
थोड़ा सा तो ख़ुश-गुमान रख दे

तुझ को तिरी हिकमतें मुबारक
इक हाथ पे इक जहान रख दे

फिर हम को गदा-ए-रह बना कर
रह में कोई इम्तिहान रख दे

तफ़्सील कहीं गराँ न पड़ जाए
इक हर्फ़ में दास्तान रख दे

अब ध्यान की बात छिड़ गई तो
कुछ इस से अलग भी ध्यान रख दे