सनम है या ख़ुदा क्या जाने क्या है
हमारा दिलरुबा क्या जाने क्या है
न सुम्बुल है न काला है न नागिन
तरी ज़ुल्फ़-ए-रसा क्या जाने क्या है
कसी पहलू नहीं आराम तुझ को
तुझे ऐ दिल हुआ क्या जाने क्या है
नहीं मालूम काबा है कि क़िबला
ख़म-ए-अबरू तिरा क्या जाने क्या है
मिरा दिल लोगे तुम या जान लोगे
तुम्हारा इंदिया क्या जाने क्या है
जफ़ाओं से तिरी भरना नहीं दिल
तड़पने में मज़ा क्या जाने क्या है
हमें तो उस से है उम्मीद-ए-बख़्शिश
मगर उस की रज़ा क्या जाने क्या है
नज़र फेरी नहीं तू ने तो हम से
ये फिर इश्वा-नुमा क्या जाने क्या है
तसव्वुर में जो की हैं बंद आँखें
दिखाई दे रहा क्या जाने क्या है
भला तू आश्ना होगा कसी का
अरे ना-आश्ना क्या जाने क्या है
क़यामत है क़द-ए-बाला तुम्हारा
निगाह-ए-फ़ित्ना-रा क्या जाने क्या है
निकलता है धुआँ जो आह के साथ
ये ऐ दिल जल रहा क्या जाने क्या है
भला मैं क्या उसे बतलाऊँ 'अंजुम'
वो मुझ से पूछता क्या जाने क्या है
ग़ज़ल
सनम है या ख़ुदा क्या जाने क्या है
मिर्ज़ा आसमान जाह अंजुम

