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सन लेवे अगर तू मिरी दिलदार की आवाज़ | शाही शायरी
san lewe agar tu meri dildar ki aawaz

ग़ज़ल

सन लेवे अगर तू मिरी दिलदार की आवाज़

शाह आसिम

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सुन लेवे अगर तू मिरी दिलदार की आवाज़
हरगिज़ न सुने फिर कभूँ मिज़मार की आवाज़

खुल जावें अगर कान तिरे दिल के तो बे-शक
हर सम्त से फिर आए तुझे यार की आवाज़

सुन कर वो सदा ताइर-ए-दिल की मिरे बोले
शायद कि ये है बुलबुल-ए-गुलज़ार की आवाज़

हो जावे कमाँ तीर-ए-फ़लक बार-ए-अलम से
सुन लेवे जो तेरे लब-ए-सोफ़ार की आवाज़

मुर्दे को जिला कर के बनावे है मसीहा
ऐ ईसा-ए-दौराँ तिरी रफ़्तार की आवाज़

सुनता हूँ मैं 'आसिम' शह-ए-ख़ादिम के लबों से
हर लहज़ा बदल शिबली और अत्तार की आवाज़