रविश-ए-सादा-बयानी मेरी
है ये तेग़-ए-सफ़हानी मेरी
ना-शनासा को न आए बावर
दास्ताँ उस की ज़बानी मेरी
मेरी हस्ती है मुमय्यज़ ब-अदम
बे-निशानी है निशानी मेरी
रख़्ना-गर है मिरी आज़ादी में
हवस-ए-बाल फ़िशानी मेरी
सबक़-ए-जहल की तकरार पे अब
मुनहसिर है हमा-दानी मेरी
दोस्ती वज़्अ-ए-तन-आसानी की
बन गई दुश्मन-ए-जानी मेरी
ख़ात्मा है मिरी तम्हीद में दर्ज
है दिल-आवेज़ कहानी मेरी
ज़ीरकी दाम-ए-फ़रेब-ए-दिल है
है तहय्युर निगरानी मेरी
दिल हो साक़ी लब-ए-दरिया साग़र
सहल है प्यास बुझानी मेरी
सुब्ह-ए-तिफ़्ली है बुढ़ापा मेरा
शाम-ए-पीरी थी जवानी मेरी
एक चक्कर है बशक्ल-ए-गिर्दाब
बंद-बरपा है रवानी मेरी
वज्ह बाक़ी मिरे मअ'नी को समझ
सूरत अलबत्ता है फ़ानी मेरी
बज़्म-ए-कसरत का तमाशाई हूँ
वहदत-ए-सर्फ़ है बानी मेरी
ग़ज़ल
रविश-ए-सादा-बयानी मेरी
इस्माइल मेरठी

