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रविश-ए-सादा-बयानी मेरी | शाही शायरी
rawish-e-sada-bayani meri

ग़ज़ल

रविश-ए-सादा-बयानी मेरी

इस्माइल मेरठी

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रविश-ए-सादा-बयानी मेरी
है ये तेग़-ए-सफ़हानी मेरी

ना-शनासा को न आए बावर
दास्ताँ उस की ज़बानी मेरी

मेरी हस्ती है मुमय्यज़ ब-अदम
बे-निशानी है निशानी मेरी

रख़्ना-गर है मिरी आज़ादी में
हवस-ए-बाल फ़िशानी मेरी

सबक़-ए-जहल की तकरार पे अब
मुनहसिर है हमा-दानी मेरी

दोस्ती वज़्अ-ए-तन-आसानी की
बन गई दुश्मन-ए-जानी मेरी

ख़ात्मा है मिरी तम्हीद में दर्ज
है दिल-आवेज़ कहानी मेरी

ज़ीरकी दाम-ए-फ़रेब-ए-दिल है
है तहय्युर निगरानी मेरी

दिल हो साक़ी लब-ए-दरिया साग़र
सहल है प्यास बुझानी मेरी

सुब्ह-ए-तिफ़्ली है बुढ़ापा मेरा
शाम-ए-पीरी थी जवानी मेरी

एक चक्कर है बशक्ल-ए-गिर्दाब
बंद-बरपा है रवानी मेरी

वज्ह बाक़ी मिरे मअ'नी को समझ
सूरत अलबत्ता है फ़ानी मेरी

बज़्म-ए-कसरत का तमाशाई हूँ
वहदत-ए-सर्फ़ है बानी मेरी