EN اردو
रंग कहते हैं कहानी मेरी | शाही शायरी
rang kahte hain kahani meri

ग़ज़ल

रंग कहते हैं कहानी मेरी

ख़ालिद अहमद

;

रंग कहते हैं कहानी मेरी
किस की ख़ुश्बू थी जवानी मेरी

कोई पाए तो मुझे क्या पाए
खोए रहना है निशानी मेरी

कोह से दश्त में ले आई है
दुश्मन-ए-जाँ है रवानी मेरी

खिल रही है पस-ए-दीवार ज़माँ
ख़्वाहिश-ए-नक़्ल-ए-मकानी मेरी

सर-ए-मरक़द हैं सभी साया-कुशा
कोई हसरत नहीं फ़ानी मेरी

तपिश-ए-रंग झुलस डालेगी
क्या करे सोख़्ता-जानी मेरी

नक़्श था मैं भी गली तख़्ती का
उड़ गई ख़ाक-ए-मआनी मेरी

क्या सुख़न-फ़हम नज़र थी जिस ने
बात कोई भी न मानी मेरी

नाक़िदों ने मुझे परखा 'ख़ालिद'
ख़ाक सहराओं ने छानी मेरी