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पिला साक़ी बहार आए न आए | शाही शायरी
pila saqi bahaar aae na aae

ग़ज़ल

पिला साक़ी बहार आए न आए

जलील मानिकपूरी

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पिला साक़ी बहार आए न आए
घटा फिर बार बार आए न आए

तुझे हम देखने आएँगे सौ बार
कोई दीवाना-वार आए न आए

कहे जाएँगे दर्द-ए-दिल हम अपना
किसी को ए'तिबार आए न आए

वो आ जाएँ इधर खोले हुए बाल
नसीम मुश्क-बार आए न आए

तुम्हें आराम से सोना मुबारक
मुझे शब भर क़रार आए न आए

हवा-ए-शौक़ में अब उड़ चले हम
हवा-ए-कू-ए-यार आए न आए

तिरे दिल में मसर्रत के खिलें फूल
मिरे दिल में बहार आए न आए

'जलील' अब मय-कशी का लुत्फ़ उठाओ
फिर अब्र-ए-नौ-बहार आए न आए