EN اردو
पत्थर से क्या शक्ल निकाले ये हम क्या जानें | शाही शायरी
patthar se kya shakl nikale ye hum kya jaanen

ग़ज़ल

पत्थर से क्या शक्ल निकाले ये हम क्या जानें

ख़ालिद अहमद

;

पत्थर से क्या शक्ल निकाले ये हम क्या जानें
आज़र किस पैकर में ढाले ये हम क्या जानें

कौन हवा का हाथ बढ़ाए नाव उलट जाए
दरिया कूदे कौन उछाले ये हम क्या जानें

नींद भरे हलकोरे लें रातें किस के हाथों
कौन चराग़-ए-सुब्ह उजाले ये हम क्या जानें

क्या कहिए किस ज़हर की काट रगों में फिरती है
किस ने बुझाए ज़हर में भाले ये हम क्या जानें

इक पानी की ओट में सारी दुनिया बस्ती है
किस ने भरे आँखों के प्याले ये हम क्या जानें

खोई हुई भेड़ें हैं हम जाने किस गल्ले की
किस दिन आ जाएँ रखवाले ये हम क्या जानें

हर दिन उस का हर शब उस की हर मौसम उस का
किस ने तने आँखों पर जाले ये हम क्या जानें

इन हाथों की छाँव मयस्सर आएगी कब तक
किस दिन पेड़ ये छाँव उठा ले ये हम क्या जानें

सात सितारे अंग तुम्हारे पलक पलक तारे
किस ने जगाए ये उजियाले ये हम क्या जानें

मौत की नींद सुला दे 'ख़ालिद' किन हाथों की थपक
नेज़ों पर सर कौन उछाले ये हम क्या जानें