EN اردو
पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए | शाही शायरी
pas-e-adab mein josh-e-tamanna liye hue

ग़ज़ल

पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए

असग़र गोंडवी

;

पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए
मैं भी हूँ इक हुबाब में दरिया लिए हुए

रग रग में और कुछ न रहा जुज़ ख़याल-ए-दोस्त
उस शोख़ को हूँ आज सरापा लिए हुए

सरमाया-ए-हयात है हिरमान-ए-आशिक़ी
है साथ एक सूरत-ए-ज़ेबा लिए हुए

जोश-ए-जुनूँ में छूट गया आस्तान-ए-यार
रोते हैं मुँह में दामन-ए-सहरा लिए हुए

'असग़र' हुजूम-ए-दर्द-ए-ग़रीबी में उस की याद
आई है एक तिलिस्मी तमन्ना लिए हुए